Tuesday, October 12, 2010

जानिए क्या हैं हिंदू पंचांग?

आकाश में तारामंडल के विभिन्न रूपों में दिखाई देने वाले आकार को नक्षत्र कहते हैं। मूलतः नक्षत्र 27 माने गए हैं।
हिंदू पंचांग की उत्पत्ति वैदिक काल में ही हो चुकी थी। सूर्य को जगत की आत्मा मानकर उक्त काल में सूर्य व नक्षत्र सिद्धांत पर आधारित पंचांग होता था। वैदिक काल के पश्चात आर्यभट, वराहमिहिर, भास्कर आदि जैसे खगोलशास्त्रियों ने पंचांग को विकसित कर उसमें चंद्र की कलाओं का भी वर्णन किया।
वेदों और अन्य ग्रंथों में सूर्य, चंद्र, पृथ्वी और नक्षत्र सभी की स्थिति, दूरी और गति का वर्णन किया गया है। स्थिति, दूरी और गति के मान से ही पृथ्वी पर होने वाले दिन-रात और अन्य संधिकाल को विभाजित कर एक पूर्ण सटीक पंचांग बनाया गया है। जानते हैं हिंदू पंचांग की अवधारणा क्या है। पंचांग काल दिन को नामांकित करने की एक प्रणाली है। पंचांग के चक्र को खगोलकीय तत्वों से जोड़ा जाता है। बारह मास का एक वर्ष और 7 दिन का एक सप्ताह रखने का प्रचलन विक्रम संवत से शुरू हुआ। महीने का हिसाब सूर्य व चंद्रमा की गति पर रखा जाता है। 

पंचांग की परिभाषा : पंचांग नाम पाँच प्रमुख भागों से बने होने के कारण है, यह है- तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण।
इसकी गणना के आधार पर हिंदू पंचांग की तीन धाराएँ हैं- पहली चंद्र आधारित, दूसरी नक्षत्र आधारित और तीसरी सूर्य आधारित कैलेंडर पद्धति। भिन्न-भिन्न रूप में यह पूरे भारत में माना जाता है। एक साल में 12 महीने होते हैं। प्रत्येक महीने में 15 दिन के दो पक्ष होते हैं- शुक्ल और कृष्ण। प्रत्येक साल में दो अयन होते हैं। इन दो अयनों की राशियों में 27 नक्षत्र भ्रमण करते रहते हैं।
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तिथि : एक दिन को तिथि कहा गया है जो पंचांग के आधार पर उन्नीस घंटे से लेकर चौबीस घंटे तक की होती है। चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं, जो दो पक्षों में बँटी हैं। शुक्ल पक्ष में 1-14 और फिर पूर्णिमा आती है। पूर्णिमा सहित कुल मिलाकर पंद्रह तिथि। कृष्ण पक्ष में 1-14 और फिर अमावस्या आती है। अमावस्या सहित पंद्रह तिथि।

तिथियों के नाम निम्न हैं- पूर्णिमा (पूरनमासी), प्रतिपदा (पड़वा), द्वितीया (दूज), तृतीया (तीज), चतुर्थी (चौथ), पंचमी (पंचमी), षष्ठी (छठ), सप्तमी (सातम), अष्टमी (आठम), नवमी (नौमी), दशमी (दसम), एकादशी (ग्यारस), द्वादशी (बारस), त्रयोदशी (तेरस), चतुर्दशी (चौदस) और अमावस्या (अमावस)।

वार : एक सप्ताह में सात दिन होते हैं:- रविवार, सोमवार, मंगलवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार।

नक्षत्र : आकाश में तारामंडल के विभिन्न रूपों में दिखाई देने वाले आकार को नक्षत्र कहते हैं। मूलतः नक्षत्र 27 माने गए हैं। ज्योतिषियों द्वारा एक अन्य अभिजित नक्षत्र भी माना जाता है। चंद्रमा उक्त सत्ताईस नक्षत्रों में भ्रमण करता है। नक्षत्रों के नाम नीचे चंद्रमास में दिए गए हैं-

योग : योग 27 प्रकार के होते हैं। सूर्य-चंद्र की विशेष दूरियों की स्थितियों को योग कहते हैं। दूरियों के आधार पर बनने वाले 27 योगों के नाम क्रमशः इस प्रकार हैं:- विष्कुम्भ, प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, शोभन, अतिगण्ड, सुकर्मा, धृति, शूल, गण्ड, वृद्धि, ध्रुव, व्याघात, हर्षण, वज्र, सिद्धि, व्यतिपात, वरीयान, परिघ, शिव, सिद्ध, साध्य, शुभ, शुक्ल, ब्रह्म, इंद्र और वैधृति।

पक्ष को भी जानें : प्रत्येक महीने में तीस दिन होते हैं। तीस दिनों को चंद्रमा की कलाओं के घटने और बढ़ने के आधार पर दो पक्षों यानि शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में विभाजित किया गया है। एक पक्ष में लगभग पंद्रह दिन या दो सप्ताह होते हैं। एक सप्ताह में सात दिन होते हैं। शुक्ल पक्ष में चंद्र की कलाएँ बढ़ती हैं और कृष्ण पक्ष में घटती हैं।
अधिक जानकारी के लिए स‌ंपर्क करें- 09311242802 या swamijinoida@gmail.com 

परिचय

उद्देश्य - ज्योतिष, वास्तु एवं कर्मकाण्ड के माध्यम से संस्कार विहीन होते जा रहे जनमानस को अपने भारतीय संस्कारों का ज्ञान दे  कर जनहित में मानव की सेवा करते हुए संस्कार केन्द्रों की स्थापना करना ।
योगदान -1. सन 2002 में विशेष वैदिक विद्वान ब्राह्मणों द्वारा सम्पन्न पूजा प्रतिक्रिया के बाद ‘‘स्वामी जी’’नाम का प्रादुर्भाव हुआ।
2. राजयोग आध्यात्मिक संस्थान की गतिविधियों को बढाते हुए समय-समय पर गरीब लड़के-लड़कियों का विवाह सम्पन्न कराना तथा गरीब बच्चों के यज्ञोपवीत आदि वैदिक संस्कार सम्पन्न कराये ।
3. सन 1997 में पूज्य गुरूदेव जगत्गुरू शंकराचार्य स्वामी शान्तानन्द सरस्वती जी महाराज के आदेश से एवं पिता आचार्य पं0 लज्जा राम दीक्षित जी के प्रेरणा से राजयोग आध्यात्मिक संस्थान की स्थापना की ।
4. सन 1992 में जागृति कला मंच की स्थापना कर उसके माध्यम  से  नवरात्रों में जनमानस के कल्याणार्थ श्री  महा लक्ष्मी एवं श्री  शतचण्डी महायज्ञ का तीन वर्षों तक आयोजन कराया ।
5. सन 1990 में नव युवक मंडल की स्थापना कर महा-सचिव के रूप में  राम-लीला, कृष्ण-लीला तथा अनेकानेक संस्कृतिक कार्यक्रमों को सम्पन्न किया ।
6. सन 1988 से सनातन धर्म सेवा समिति से धर्म- प्रचारक के रूप में जुड़ कर भव्य मन्दिर निर्माण में अधिकाधिक सहयोग किया।
7. सन 1979 से 1988 तक विश्व विख्यात महर्षि महेश योगी की संस्था से जुड़कर अपने  पिता   आचार्य  पं0  लज्जा राम दीक्षित जी (धर्माचार्य,   वरिष्ठ प्राचार्य एवं ज्योतिष विभागाध्यक्ष) के  सान्निध्य में वेद-पाठ, कर्मकाण्ड,  वास्तु, ज्योतिष आदि का अध्ययन करते हुए करीब 4000  वैदिक ब्राह्मणों को प्रशिक्षण दिया एवं उन्हें संस्कारों का ज्ञान कराया।
अन्य गतिविधियां: 1. सन 1992 से भारत के अनेकों प्रतिश्ठित  समाचार पत्रों में वरिष्ठ संवाददाता, डेस्क-प्रभारी, सह-संपादक, समाचार संपादक आदि के  पदों पर  कार्य करते हुए वर्तमान में स्वतंत्र पत्रकार के रूप में कार्यरत।
2. अनेकों प्राइमरी पाठशालाओं एवं पब्लिक स्कूलों में समय-समय संस्कार शिविरों का अयोजन करना ।
शिक्षा:- हाई स्कूल- उ0प्र0 बोर्ड।
इन्टर मीडिएट- उ0प्र0 बोर्ड ।
शास्त्री- सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी
आचार्य- सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी
पी.एच.डी. (संस्कार)-एम.ई.आर.यू., मॉरीशस
विशेष शिक्षा:-   बी.जे.एम.सी.- अवधेश प्रताप विश्वविद्यालय, रीवा, म. प्र.
एम.जे.एम.सी.-  मारवाह इन्टीट्यूट आफ मास कम्यूनिकेशन, नोएडा
डिप्लोमा- वास्तु , ज्योतिष एवं कर्मकाण्ड विशेषज्ञ- भारतीय वास्तु एवं ज्योतिष शोध संस्थान म.प्र.
डिप्लोमा- जेम्स टेस्टिंग, जेम्स एण्ड ज्वेलरी टेस्टिंग इस्टीट्यूट, नई दिल्ली
अभिरूचि:पठन-पाठन, धार्मिक स्थलों का भ्रमण, यज्ञ-अनुष्ठान, कर्मकाण्ड आदि विषयों पर शोध करना।
दक्षता:-  समस्त वैदिक संस्कारों को धाराप्रवाह सम्पन्न कराना । समस्त प्रकार की जन्म पत्रिकाओं का निर्माण एवं विवेचन । जागृत वैदिक/पौराणिक मंत्र शक्तियों द्वारा ग्रहों की शान्ति करना एवं वैदिक विद्वान ब्राह्मणों द्वारा सम्पन्न कराना ।  रत्न चिकित्सा द्वारा मानव जीवन की समस्त कठिनाईयों  का समाधान करना ।  घर एवं घर का मानचित्र देख कर वास्तु दोष निवारण करना । प्रश्न लग्न के आधार पर जन्म पत्रिका निर्माण एवं भूत-भविष्य कथन ।
आकांक्षा  एवं संकल्पः- विश्व शान्ति के लिए मानव का  सुसंस्कृत, सुदृढ़ एवं चेतनावान , चरित्र निर्माण करना ।
अन्य विवरण:- पिता - आचार्य पं0 लज्जा राम दीक्षित
जन्म तिथि 15 जून 1969
जन्म स्थान - नैमिषारण्य जनपद-सीतापुर, उ.प्र.